कौन है इमाम अहमद रज़ा

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*🥀 कौन है इमाम अहमद रज़ा 🥀*



🔛 आला हज़रत رضي الله عنه की विलादत 10 शव्वाल 1272 हिजरी ब मुताबिक 14 जून 1856 बारोज़ ए शुंबा जोहर के वक़्त शहर ए बरेली मुहल्ला सौदागरान (जसूली) में हुई।
आपका पैदाइशी नाम मुहम्मद और जद्दे अमजद मौलाना रज़ा अली ने आपका इस्म "अहमद रज़ा" रखा।

आपने अपनी 4 बरस की नन्ही सी उमर में कुरान शरीफ़ खत्म कर लिया।
*13 साल 10 माह और कुछ दिन में मुफ्ती बन गए।*
आला हज़रत رضي الله عنه के मिजाज़ तकरीर और तहरीर में जो शखती थी वो हुज़ूर सैय्यद ए आलमﷺ के गुस्ताखो के लिये थी वफ़ादारों के लिए तो आप अबरे करम थे।

आला हज़रत رضي الله عنه के यहाँ महफ़िल ए मिलाद होती तो आप सादात ए किराम को दुग्ना नज़राना देते और सादात का ख़ूब एहतराम करते।

*और आप मुरीद भी हुए तो मारेहरा शरीफ़ में हुजूर सैय्यद आले रसूल अहमदी رضي الله عنه से।*
सैयद आले रसूल अहमदी رضي الله عنه फरमाते है मुझे बड़ी फ़िक्र थी के अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त पूछेगा के आले रसूल तू क्या लाया है तो मैं क्या कहूँगा। मगर अब मैं मौलाना अहमद रज़ा को पेश कर दूंगा

किसी शायर ने इस वक़िये को क्या ख़ूब बयान किया है।
 *रोज़ ए महशर अगर मुझसे पुछे खुदा, बोल आले रसूल तू लाया है क्या...*
  *अर्ज़ कर दूंगा लाया हु अहमद रज़ा, या खुदा ये अमानत सलामत रहे"।*

इमाम अहमद रज़ा ने 1330 हिजरी में क़ुरान ए हकीम का तारजुमा फ़रमाया जो कंज़ुल ईमान फ़ी तरजामतिल क़ुरान के नाम से मशहूर है।
उर्दू तारजिम ए कुरान की साफ में कन्ज़ुल ईमान को इम्तियाजी हैसियत हासिल है।

आला हज़रत رضي الله عنه ने अपनी सारी ज़िंदगी इश्क ए मुस्तफ़ा ﷺ की दौलत तकसीम करने में लगा दी दुनिया भर के बड़े बड़े औलमा और फुक़्हा ने आपको मुजद्दीद तसलीम किया । 

आपके नातीया कलाम की सारी दुनिया में धूम है आज भी, और इन शाह अल्लाह सुबे कयामत तक रहेगी, जो लज्जत और इश्क ए रसूल की गहराई आपके कलाम में पाई जाती है वो बे मिस्लो मिसाल है।

आपका लिखा हुआ कलाम "मुस्तफा ﷺ जाने रहमत पे लाखो सलाम" वो कलाम है जो आज दुनिया भर में अज़ान के बाद सब से ज्यादा पढ़ा जाता है।
 *दाल दी कल्ब में अजमत ए मुस्तफाﷺ*
 *सैय्यादी आला हज़रत رضي الله نه पर लाखो सलाम*



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