इमाम अहले सुन्नत मुजद्दिदे आजम आला हजरत अहमद रजा खाँ अलैहिर रहमह के कलम से

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴



*🥀 इमाम अहले सुन्नत मुजद्दिदे आजम आला हजरत अहमद रजा खाँ अलैहिर रहमह के कलम से 🥀*



 ✏ किसी बद अक़ीदा वहाबी देवबंदी से निकाह पढ़वाना हराम है। और मुसलमान जानकार पढ़वाये तो काफ़िर हो जाएगा अगरचे निकाह हो जाएगा ।

*📚 फतावा रज़विया जि 11 सफा 219)*

✏ कोई शरई रुकावट (रजाअत यानी दूध का रिशता । मुसाहरत यानी ससुराली रिशता वगैरा) ना हो तो जेठ व देवर से निकाह जाइज है।(शौहर के इन्तिकाल या तलाक देने के बाद )

*📚 फतावा रज़विया जि 11 सफा 290)*

✏ मर्द व औरत हरामी (खिलाफ़े शरई पैदाइश हो जैसे जिना के हों ) सुन्नी हों तो किसी सुन्नी से उसका निकाह ज़ाइज़ है।

*📚फतावा रज़विया जि 11 सफा 329)*

✏ किसी बदमज़हब (देओ बंदी , वहाबी , तबलीगी , शिआ , भोरी , व गैरह ) औरत को निकाह में लाते वक़्त यह ख्याल करना के इसकी बदमज़हबी हमें क्या नुकसान देगी
 बल्कि उसे सुन्नी कर लेंगे महज़ हिमाकत(बे वकूफी ) है।
 यह रिश्ता (यानी मियां बीवी का रिशता ) तो मुहब्बत पैदा करता है और आदमी मुहब्बत में अँधा वा बहरा हो जाता है।

*📚 फतावा रज़विया जि 11 सफा 368)*

👉 और याद रहे के बद मजहब लड़की से निकाह नही होता है जब तक के वह सच्चे दिल तौबा कर के कलिमह ना पढ़ले ।आज कल लोग देओ बंदी वहाबी व गैरह बद मजहब लड़की से यह सोच कर शादी कर लेते हैं कि बाद मे उसे सुन्नी बना लेंगे लेकिन सवाल यह है कि सुन्नी बनाएंगे कब ? सुहाग रात से पहले या बाद ? सुहाग रात के बाद बनाएंगे तो सुहाग रात की हमबिसतरि जिना कारी होगी और अगर सुहाग रात से पहले सुन्नी बनाएंगे तो इस वक्त निकाह कौन पढ़ाएगा कियों के अभी तक निकाह हुवा ही नही है सुन्नी करने के बाद निकाह जरूरी है बगैर निकाह हमबिसतरी हराम व जिना है ।

यह बहुत मुशकिल मसअलह है लिहाजा सुन्नी लड़कों को इस तरह के खयालात अपने दिमाग मे भी नही लाना चाहिए ।

नीज देखा यह गया है के जो लड़के शादी से पहले लड़की को सुन्नी बनाने के बड़े बड़े दावे करते थे वह शादी के बाद लड़की को सुन्नी बनाने कि बजाए खुद उसकी झोली मे जाकर उसी के हम मजहब हो गए ।

अल्लाह हिफाजत फरमाए।

*✏ बीवी का कफ़न शौहर के जिम्मा है।*

*📚 फतावा रज़विया जि 23 सफा 611)*

इन अहकाम पर अमल कीजिए ।
*मस्लके आला हजरत --जिन्दाबाद*



👑👑👑👑👑👑👑👑👑👑
*🏁 MASLAKE AALA HAZRAT 🔴*
https://chat.whatsapp.com/ERGah4bKksUIHdlxfhJuBz

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

Aur Jo Unse Kaha Jaye Zamin Me Fasaad Na Karo To Kahte Hai Hum To Sanwarane Wale Hai(Ayat 11)7⃣

इमाम अहमद रज़ा खां फ़ाज़िले बरैलवी अलैहिर्रहमा कितने बार हज़ व ज़ियारत की सआदत से मुशर्रफ़ हुए*0️⃣1️⃣

आला हज़रत और नामूस ए रिसालत ﷺ का पहरा